कोरोना जांच के नाम पर भी कुंभ में हुआ बड़ा खेल

हरिद्वार। हरिद्वार कुंभ मेला २०२१ के दौरान कोरोना जांच के नाम पर बड़े खेल का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले की जांच जिलाधिकारी सी रविशंकर को सौपी गई है। जिलाधिकारी ने एक कमेटी का गठन कर जांच शुरू करा दी है। वहीं पता चला है कि कोरोना टेस्ट घोटाले के मामले में प्रदेश सरकार ने आरोपी निजी लैब का पेमेंट रोक लिया है। शासन को हरिद्वार डीएम की रिपोर्ट का इंतजार है। हरिद्वार जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद तथ्यों के आधार पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी सी रविशंकर ने सीडीआे की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी मामले की जांच कर रही है।
क्या है कोरोना टेस्ट घपला का मामला
कुंभ मेला २०२१ के दौरान सरकार ने मेले में कोरोना संक्रमण की दर कम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा आरटी पीसीआर और एंटीजन टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे। इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग और मेला स्वास्थ्य विभाग ने कुल 2 निजी टेस्ट लैब के साथ अनुबंध किया था। आरोप है कि हरियाणा की एक निजी टेस्ट लैब ने कोरोना की एंटीजन टेस्ट में फर्जीवाड$ा किया है। सरकार से ज्यादा भुगतान पाने के लिए लैब ने फर्जी आधार कार्डों पर टेस्ट करना दर्शाकर इन सभी कोविड टेस्ट को नेगेटिव बताया गया। मामला आईसीएमआर के संज्ञान में आने के बाद शासन ने इसकी जांच की और एक कंपनी के काम में अनियमितता पाए जाने पर डीएम हरिद्वार को इसकी जांच सौंपी गई।मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एस के झा ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि पूरा मामला चूंकि जिलाधिकारी द्वारा गठित कमेटी की जांच के दायरे में है इसलिए फिलहाल कुछ भी कहा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि कहां और किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है। वहीं कुंभ मेलाधिकारी( स्वास्थ्य) डा. अर्जुन सिंह सेंगर से बात की गई तो उन्होंने भी यहीं कहा कि जांच के बाद ही कुछ पता चल पाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर भी चार सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है, जिसने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। बताया जाता है कि जिस कम्पनी को यह कार्य ठेके पर दिया गया था वह बाकायता पैनल में सूचीबद्ध थी। 

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