बच्ची के दूध ओर आर्थिक हालात ने किया मजबूर

गैंडीखाता / हरिद्वार।

गैंडीखाता / हरिद्वार।
कोरोना संकट के कारण लाकडाउन के चलते सिडकुल हरिद्वार की विभिन्न क पनियों में काम करने वाले उत्तर प्रदेश के मजदूरों का हाईवे व जंगलों से लाक डाउन के 36 वे दिन भी जाना बरकरार है। जो अपने आप में इस मजदूरी पेशा परिवार की दयनीय स्थिति जो बड़ी ही विकट व असहज कर देने वाली है। सोनू अपनी पत्नी अनीता व 8 माह की बच्ची राधिका के साथ हरिद्वार के सिडकुल में किसी कंपनी में कार्य करता है। सोनू व उसकी पत्नी ने बताया उनके पास खर्चे की विकट समस्या आ जाने के कारण उन्हें मजबूरीवस पैदल ही अपने घर नगीना तहसील के गांव जलालपुर जिला बिजनौर उत्तर प्रदेश के लिए जाना पड़ रहा है। क्योंकि उनके सामने 1 महीने से लगातार बच्ची के दूध को लेकर व खाने पीने की समस्या पैदा हो गई। ऐसे में उन्होंने हरिद्वार से अपने गांव जाना ही अपने व बच्ची के हित में समझा। जिसके कारण आज प्रात: 4 बजे पैदल ही वेे अपने घर के लिए निकल पड़े। दंपत्ति व बच्ची कभी हाईवे से तो कभी वन मार्ग से होकर अपने घर जाने की जल्दी में है। अनीता ने बताया कि बच्ची को गोद में लेकर चलते चलते जब दंपत्ति थक जाते है, तो थोड़ा आराम करने के लिए हाईवे के किनारे पेड के नीचे बैठ जाते हैं। आराम करने के बाद फिर से बच्ची को गोद में उठाकर चल पडते हैं। चिडियापुर जंगल के पास बैठे हुए इस दंपत्ति पर हाईवे पर चलते बाइक सवार की नजर उनकी 8 माह की बच्ची को रोता हुआ देखकर बाइक सवार जो बोतल में दूध लेकर अपने घर अपने बच्चे के लिए ले जा रहा था। उसने इस बच्ची की परेशानी को समझते हुए इस दंपत्ति को उस में से दूध दिया तथा दंपत्ति ने राहगीर का आभार प्रकट किया। सोनू अनीता ने बताया कि उनके सामने रहने की तो कोई समस्या नहीं थी लेकिन उनके सामने खानपान व बच्चेे के लिए प्रतिदिन दूध की आर्थिक समस्या थी। अब उन्हें जल्द से जल्द अपने गांव पहुंचने की जल्दी है। लॉक डाउन जहाँ काल के ग्रास से बचने में मदद कर रहा है वही बहुत सारी परेशानियां भी जनता के सामने आ रही है। हम आप से विन्रम निवेदन करते है कि यदि आप के आस पास ऐसे मजबूर लोग हो तो उनकी मदद बिना किसी भेदभाव के अवश्य करे। हम सभी देश वासी भारत माता की संतान है।

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