तीनों वैष्णो अनी अखाड ने निशान साहिब की पूजा की


हरिद्वार।
अखिल भारतीय तीनों वैष्णो अनी अखाड$ों के निशान साहिब की पूजा वैरागी संत महापुरुषों के सानिध्य में नील पर्वत स्थित मां चंडी देवी मंदिर के प्रांगण में विधिवत रूप से की गई। इस दौरान मां चंडी देवी मंदिर परमार्थ ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित गिरी ने सभी संत महापुरुषों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया। पूजन के पश्चात अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड$े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि वैष्णव अखाड$ों की परंपरा अनुसार धर्म ध्वजारोहण से पहले निशान साहिब का पूजन किया जाता है। वैष्णव संप्रदाय की कुलदेवी मां चंडी देवी है। जिनके आशीर्वाद से कुंभ मेला दिव्य और भव्य रुप से संपन्न होता है। उन्होंने कहा कि मां चंडी देवी की कृपा से कोरोना महामारी जल्द समाप्त होगी और पूरे विश्व में खुशहाली लौटेगी। श्रीपंच निर्वाणी अनी अखाड$े के अध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास महाराज एवं श्रीपंच ंिबर अनी अखाड$े के अध्यक्ष श्रीमहंत कृष्ण दास नगरिया महाराज ने कहा कि विश्व धरोहर कुंभ मेला सनातन प्रेमियों की आस्था का केंद्र है। जो पूरे विश्व में धर्म एवं संस्कृति की पताका को लहराता है। अखाड$ों की परंपराए पूरे विश्व में भारत को महान बनाती हैं और मां चंडी देवी की कृपा सौभाग्यशाली व्यक्ति को प्राप्त होती है। कहा कि मां चण्डी देवी की असीम कृपा से कुंभ मेला निर्विघ संपन्न होगा। महंत गौरीशंकर दास महाराज ने कहा कि संतों के सानिध्य में किया गया। धार्मिक अनुष्ठान अवश्य ही पूरे विश्व के लिए हितकारी होगा और मां चंडी देवी कृपा से जल्द ही पूरे विश्व को कोरोना महामारी से निजात मिलेगी। महंत रोहित गिरी महाराज ने सभी संत महापुरुषों का स्वागत करते हुए कहा कि संत महापुरुषों के तपोबल से ही देश दुनिया में भारत की अलग पहचान है और कुंभ मेला सनातन संस्ति का शिखर उत्सव है। कुंभ के दौरान पतित पावनी मां गंगा में आचमन करने मात्र से ही व्यक्ति का जीवन भवसागर से पार हो जाता है। उन्होंने कहा कि वैष्णव संप्रदाय के संत कुंभ मेले के प्राण हैं। जो देश दुनिया में भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म का प्रचार प्रसार कर धर्म की महत्ता को दर्शाते हैं। मां चंडी देवी की पावन कृपा से कुंभ मेला निर्विघ संपन्न होगा। इस दौरान महंत रामशरण दास, महंत रामजी दास, महंत मोहनदास खाकी, महंत भगवान दास खाकी, महंत विष्णुदास, महंत रामकिशोर दास शाी, महंत दुर्गादास, महंत रघुवीर दास, महामण्डलेश्वर सांवरिया बाबा, महंत रामदास, महंत हिटलर बाबा, महंत रामप्रवेश दास, महंत हरिदास, बालकदास महात्यागी, महंत प्रेमदास, महंत सूरजदास, महंत राजेंद्रदास, महंत सुमित दास, महंत अवध बिहारी दास आदि मौजूद रहे।

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