पेशवाई के रूप में छावनी पहुंचे निरंजनी अखाडा पीठाधीश्वर



हरिद्वार।
निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने भव्य पेशवाई के रूप में अखाड$े की छावनी में प्रवेश किया। जगजीतपुर स्थित आद्य शक्ति महाकाली मंदिर से शुरू हुई पेशवाई देशरक्षक तिहारा, बंगाली मोड$, शंकराचार्य चौक, डामकोठी, तुलसी चौक होते हुए निरंजनी अखाड$े पहुंची। रथ पर सवार निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी, आनन्द पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी, अखाड$ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी, निरंजनी अखाड$े के कुंभ मेला प्रभारी श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज के दर्शन व आशीर्वाद पाने के लिए पेशवाई मार्ग के दोनो और खड$े श्रद्धालु भक्तों व गणमान्य लोगों ने पुष्पवर्षा कर पेशवाई का स्वागत किया। ढोल नगाड$ों, बैण्ड बाजों से सुसज्जित पेशवाई में घोड$ों पर सवार नागा सन्यासी सबके आकर्षण का केंद्र रहे। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति की छठा पेशवाई के माध्यम से दिखायी जाती है। आदि अनादि काल से संत महापुरूषों द्वारा हिंदू संस्कृति एवं सनातन संस्कृति का प्रचार प्रसार किया जाता है। कुंभ मेला हिंदुआें की आस्था का पर्व है। आनन्द पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज ने कहा कि पेशवाई के रूप में संत महापुरूष निरंजनी अखाड$े के संत महापुरूष धर्म क्षेत्र मे अनुकरणीय योगदान दे रहे हैं। देश दुनिया में सनातन संस्कृति की पताका को फहराने का काम किया जा रहा है। अखाड$ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा कि मां गंगा के आचमन मात्र से ही श्रद्धालु भक्तों का कल्याण हो जाता है। कुंभ मेले में गंगा स्नान करने से कोरोना महामारी दूर होगी। मां गंगा के आशीर्वाद से कुंभ मेला दिव्य भव्य रूप से संपन्न होगा। श्रीमहंत रविन्द्रुपरी महाराज ने कहा कि मां मनसा देवी की कृपा दृष्टि से कुंभ मेला सकुशल संपन्न होगा। मां मनसा देवी श्रद्धालु भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती है। कुंभ मेला भारतीय संस्कृति की पहचान है। छावनी पहुंचने पर संतों ने पुष्पवर्षा कर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज का स्वागत किया। इस दौरान श्रीमहंत रामरतन गिरी, श्रीमहंत दिनेश गिरी, श्रीमहंत लखन गिरी, श्रीमहंत आेंकार गिरी, महंत राधे गिरी, महंत केशवपुरी, महंत मनीष भारती, स्वामी आनन्द गिरी, स्वामी राधाकांताचार्य, स्वामी अनुरागी महाराज, आचार्य मनीष जोशी, स्वामी नत्थीनंद गिरी, महंत विकास गिरी, स्वामी सत्यानंद गिरी, ंिबर बलवीर पुरी, ंिबर आशुतोष पुरी, स्वामी आलोक गिरी, स्वामी रघुवन, स्वामी अवंतकानंद ब्रह्मचारी, स्वामी कृष्णानंद ब्रह्मचारी, स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी आदि सहित अनेक संतगण मौजूद रहे।

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